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एक कदम और चलते है ।

आ चल एक कदम और चलते है । 
दूर डगर नापने की बात करते है ॥ 
फूलो को हाथो में समेट, 
पानी से आकाश की रंगोली भरते है।। 

एक कदम और चलते है ।।

आ मिल शाम को भोर बनाये। 
आ मिल जोर से शौर मचाये ॥ 
सुरों को धुनों की मिटटी से मलते है ,
आ चल एक कदम और चलते है ।।

.....................  साथ चलते है ॥ 

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निश्चय..!!

प्रारंभिक भोर में लिया दृढ़ निश्चय,

शंध्या आते विफलता की चौखट लांघ लेता है.!!

प्रतिबिम्ब सा मन ओज से भरा,

परिस्तिथियों से तल्लीन खुद को अधीन बना लेता है। !!

मैं ही क्यों .........!!!!!

मैं ही क्यों सबके सामने झुकू...

मैं ही क्यों हर बार अपनी जिम्मेदारी निभाऊ......

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क्या बेटी का मन नहीं होता....

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मैं ही क्यों... अपने सपनो को पूरा होने से रोकू...



मेरा कुछ बोलना लोग बगावत समझते है...

अगर कुछ मांगू तो खिलाफत समझते है...

क्यों मुझे ही समाज के नाम पे दबाया जाता है...

क्यों मेरी भावनाओ को मिटाया जाता है.....

मैं ही क्यों खुद को समाज की भट्टी में झोकू..

मैं ही क्यों अपनी भावनाओ को रोंदू.....

मैं ही क्यों .........!!!!!


Stop Domestic Violence Against Women 


दुविधा...!!!!

मन ऐसो मेलन भरा, ते तन सुच्चो कैसो कहाय ...!
जे सोचु हरी ते पाप हरे, ते पूजन न सुहाय ...!!
ऐसो दुविधा सांस लगी, न निति कोई सुझाय ...!
तर जाऊ मैं पाप ते, या खुद ने देउ डुबोय ....!!