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Showing posts from May, 2011

ख़ुशी.......!!!!

बंजर मिटटी को बारिश की बूंदों से ख़ुशी...
बारिश की बूंदों को बादल की ओट से ख़ुशी...
ख़ुशी आँखों को उसके सपनो से...
सपनो को चैन  की नींद से ख़ुशी.....

भक्त को उसके भगवान से ख़ुशी...
भगवान  को भक्त की भक्ति से ख़ुशी.....
ख़ुशी होटों को मुस्कराहट से...
मुस्कराहट को होटों के खिलने से ख़ुशी....


माँ को अपने बच्चे के खिलखिलाने से ख़ुशी...
बच्चे को अपनी  माँ के आंचल से ख़ुशी...
ख़ुशी कदमो को मंजिल के पाने से...
मंजिल को कदमो के पाने से ख़ुशी..

प्यार में किसी को सताने से ख़ुशी...
सता कर फिर मानाने से ख़ुशी...
ख़ुशी किसी के  आसुओं  को पौछ्ने से...
आसुओं को बहकर हसने से ख़ुशी...

किसी गिरते हुए को सहारे से ख़ुशी....
किसी सहारे को सँभालने से ख़ुशी......
ख़ुशी मुश्किलों को पार कर जाने से....
मुश्किलों को हराकर आगे बढ जाने से ख़ुशी.....

गरीब को रोटी के टुकरे से ख़ुशी.....
रोटी को गरीब की भूक मिटाने से ख़ुशी......
ख़ुशी खुशियों को हासिल कर जाने से.....
खुशियों को गम हारकर जीत जाने से ख़ुशी...


Keep Smiling 

मैं ही क्यों .........!!!!!

मैं ही क्यों सबके सामने झुकू...

मैं ही क्यों हर बार अपनी जिम्मेदारी निभाऊ......

मैं ही क्यों हर बात के लिए खुद को  कोसु.. 

मैं ही क्यों हर बार त्याग करू...




क्या बेटी का मन नहीं होता....

अपनी इच्छा को सबके सामने रखने का..

या फिर उसका हक़ नहीं होता...

अपने सापको को पूरा करने का....

मैं ही क्यों... अपनी इच्छाओ का गला घोटू..

मैं ही क्यों... अपने सपनो को पूरा होने से रोकू...



मेरा कुछ बोलना लोग बगावत समझते है...

अगर कुछ मांगू तो खिलाफत समझते है...

क्यों मुझे ही समाज के नाम पे दबाया जाता है...

क्यों मेरी भावनाओ को मिटाया जाता है.....

मैं ही क्यों खुद को समाज की भट्टी में झोकू..

मैं ही क्यों अपनी भावनाओ को रोंदू.....

मैं ही क्यों .........!!!!!


Stop Domestic Violence Against Women