Skip to main content

Posts

Showing posts from April, 2011

माँ...!!!

माँ ...

मै तो तेरी बेटी हूँ ....माँ ......

फिर क्यों नही तू मुझको   समझती.....माँ ...

तेरी गोदी में सिर रख के सोना चाहती  हूँ ....माँ...

एक बार तो मेरे सिर पे हाथ रख दो .... माँ...

मुझे कोई सुख नही चाहिये...और न हीं कोई हँसी...

मुझे तो बस दुःख की इच्छा है ... ...माँ......

जिससे  तू  मेरे साथ  रहेगी न ....माँ.....

बस एक बार तो प्यार से पुकार लो..... माँ....

एक बार तो मुझसे बाते कर लो ..... माँ....

एक बच्चे की  तरह तुझसे लिपटना चाहती हु... माँ...

एक बार  तो अपने हाथ बड़ा लो ..... माँ.....

मैं कब से  तेरा रास्ता देख रही हूँ ... माँ...

मेरे कदम अपनी और ले लो..... माँ.....

...माँ.....

अच्छा लगता है........!!!!!

अच्छा लगता है तुमसे कुछ कहना...

तुम्हारी बातो को सुनना...

तुम्हे सोचते हुए ... आंखे बंद कर लेना.....

फिर मुस्करा देना.....

अच्छा लगता है........


हवा जब गुजरती है .. कानो से.. तो तुम्हे सोच लेती हूँ .....

की तुमने कुछ कहा है धीरे से......

उस हवा की फुसफुसाहट को सुनना...

अच्छा लगता है........


अकेले चलते हुए तुम्हे सोच लेती हूँ.....

की अगले ही पल तुम आओगे ...

और मेरा हाथ थाम के मेरे साथ चलोगे........

तुम्हारी सोच के साथ चलना......

अच्छा लगता है...........


भूल जाती हूँ मैं की उदासी भी कोई चीज होती है...

तुम्हे सोच कर गिरते हुए भी संभल जाती हूँ मैं..

तुम्हारी सोच में लगता है .. जैसे अनजानी सी खुसी मेरे पास है...

उस ख़ुशी को महसूस करना.....

अच्छा लगता है.........

रौशनी........!!!!!!!

सोचा आज के चलो....

सूरज की रौशनी में खुद को भिगो देते है.....

आँखों को आज खुशियों से डुबो देते है....

फेला के अपने दोनों हाथ ..

खड़े हो गये...

उसे देखने को...

की कब उसकी नजर हम पर पड़ेगी...

और मेहरबान होकर मुझ पर बरसेगी...

हाथो को तैयार रखा था..

मुट्ठी में बदलने को...

उसकी रौशनी को ... समेटने को.....

आंखे बंद किये खड़े थे इंतजार में .....

की.....

एक अंधियारी सी महसूस हुई.

जब देखा तो एक बादल....

मेरी खुशियों के बीच आ चूका था .....

और एक ही पल में ....

बरस पड़ा मुझ पर.....

उसके पानी में ही मेरे आसू भी बह गये...

और हम वही पर तरसे से ही रह गये.....

हमारी किस्मत में एक रौशनी भी नसीब नहीं .....

हम फिर उसी अँधेरी राह पे गुम होके चल दिए.....



Request .........!!!!

our country has around 25 million orphans out of 135 millions orphans in whole world...These children live their life without love and proper care.....Future of our country living without support and without  good upbringing... if you capable to parent 2nd child... than please adopt a child... your this step can change whole life of someone...than and give your contribution to make country strong...
Please think about it for a while.... its my extremely Request to all of you
Thanks.




Authority to live.........!!!!

In India every woman faces many punishments…. Cultural and Social factors are interlinked with the development of violent behavior. We all discuss about female feoticide. But we don’t think ever girls so tortured in our society. Just think a girl in our society how many types of torture she faces…. First of all take a glance below……..
1.Dowry Dowry is prohibited in 1961 under Indian Law. Around 2500 complains of bride burning registered every year, while number of dowry deaths are about 9000 per year. These number increase at a rate of 1-2% every year. Because of Dowry number of girls put at the door of death. It’s also the reason, why many parents don’t want to have daughter.
2.Domestic Violence At home girls suffer this problem. They are emotionally blackmail in the name of reputation of family in the society. Every 2nd girl abused by family and get mentally torture. It’s grown as a big problem and many girls try to attempt suicide. 3.Sexually Violence These cases also reported. It is know…

जिन्दगी...........!!!!

कभी हसती हूँ..... तो कभी रोती हूँ ......!!

तो कभी खुद को सांत्वना देती हूँ ......!!

फिर दूजे ही पल खुद को बेसहारा पाती हूँ ......!!

पता नहीं क्यों अब तो हर चीज को मुझसे बेर सा हो गया है......!!

कहने को तो अपना पर.. नसीब ही गैर सा हो गया है.....!!

कभी कोसती हूँ ओरो को जो मुझे समझ नहीं पाते ......!!

तो कभी खुद को जो कभी सफल नहीं हो पाती हूँ ..........!!


आईने में देखती हूँ खुद की ही आँखों को....!!

कोरो में फसी पानी की बूंदों को .........!!

या फिर यूँ कहिये..आँखों से ओझल हसी को ढूंडती हूँ......!!

तो कभी खुद से ही घिन्ना के खुद को भी नहीं निहार पाती हूँ......!!


अब तो एक एक पल बहूत भरी सा लगता है.......!!

रात को सुबह कर और सुबह को रात का इंतज़ार रहता है.....!!

मन में बस यही बात रहती है.......!!

किसी तरह ये रात कट जाये ....... !!

बस किसी तरह ये दिन निकल जाये.......!!

जिन्दगी ने इतनी ठोकर दी है.....!!

की अब तो जीने की वजह भी नहीं ढूंड पाती हूँ.......!!