Tuesday, March 15, 2016

आ चल एक कदम और चलते है । 
दूर डगर नापने की बात करते है ॥ 
फूलो को हाथो में समेट, 
पानी से आकाश की रंगोली भरते है।। 

एक कदम और चलते है ।।

आ मिल शाम को भोर बनाये। 
आ मिल जोर से शौर मचाये ॥ 
सुरों को धुनों की मिटटी से मलते है ,
आ चल एक कदम और चलते है ।।

.....................  साथ चलते है ॥ 

Tuesday, June 23, 2015

ढीठ.. !!!!

जो तू अड़ियल, तो मैं भी ढीठ  बड़ी !
जो तू सामन्त, तो मैं  भी सैठ  बड़ी !!
मत कर जतन उलझाने की मुझे !
जीतेगी तो तुझसे मेरी ऐंठ  बड़ी !!

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