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ENHANCE YOUR THINK BEYOND THE WORLD

The Happy man is the man who lived objectively, who had free affection and wide interest, who secure his happiness through these interest and affection. To be the recipient of affection is a potent cause of happiness. The main reason of unhappiness is that he thinks only about cause of his unhappiness. He continues to be self -centered and therefore does not get outside. Although this difficulty is real, there is nevertheless much that he can do if he has rightly diagnosed his trouble. So think Objectively not Subjectively

Comments

  1. congratulations.... nice thoughts

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  2. hmm one of the fact of the ideal life :D

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  3. yaap u r right ,4 a perfect n enjoyfull life we have to communicate wid our surroundings, not to compresed it within self ,n dis is the problem wid humans they got only negativ points,never try to got positiv points .gud job dear keep it up.

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  4. वसन्त की आप को हार्दिक शुभकामनायें !

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  5. keep on writing going good
    thought is superb

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निश्चय..!!

प्रारंभिक भोर में लिया दृढ़ निश्चय,

शंध्या आते विफलता की चौखट लांघ लेता है.!!

प्रतिबिम्ब सा मन ओज से भरा,

परिस्तिथियों से तल्लीन खुद को अधीन बना लेता है। !!

मैं ही क्यों .........!!!!!

मैं ही क्यों सबके सामने झुकू...

मैं ही क्यों हर बार अपनी जिम्मेदारी निभाऊ......

मैं ही क्यों हर बात के लिए खुद को  कोसु.. 

मैं ही क्यों हर बार त्याग करू...




क्या बेटी का मन नहीं होता....

अपनी इच्छा को सबके सामने रखने का..

या फिर उसका हक़ नहीं होता...

अपने सापको को पूरा करने का....

मैं ही क्यों... अपनी इच्छाओ का गला घोटू..

मैं ही क्यों... अपने सपनो को पूरा होने से रोकू...



मेरा कुछ बोलना लोग बगावत समझते है...

अगर कुछ मांगू तो खिलाफत समझते है...

क्यों मुझे ही समाज के नाम पे दबाया जाता है...

क्यों मेरी भावनाओ को मिटाया जाता है.....

मैं ही क्यों खुद को समाज की भट्टी में झोकू..

मैं ही क्यों अपनी भावनाओ को रोंदू.....

मैं ही क्यों .........!!!!!


Stop Domestic Violence Against Women 


दुविधा...!!!!

मन ऐसो मेलन भरा, ते तन सुच्चो कैसो कहाय ...!
जे सोचु हरी ते पाप हरे, ते पूजन न सुहाय ...!!
ऐसो दुविधा सांस लगी, न निति कोई सुझाय ...!
तर जाऊ मैं पाप ते, या खुद ने देउ डुबोय ....!!