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ढीठ.. !!!!

जो तू अड़ियल, तो मैं भी ढीठ  बड़ी !
जो तू सामन्त, तो मैं  भी सैठ  बड़ी !!
मत कर जतन उलझाने की मुझे !
जीतेगी तो तुझसे मेरी ऐंठ  बड़ी !!

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पुरुषत्व ..!!

मेरे अभिमान को अहंकार का नाम देने से पहले
अपने पुरुषत्व की परिभाषा बदल,
ये तेरे द्वारा दिए गए अनुभवों का  ही परिणाम हैं ।।

मैं ही क्यों .........!!!!!

मैं ही क्यों सबके सामने झुकू...

मैं ही क्यों हर बार अपनी जिम्मेदारी निभाऊ......

मैं ही क्यों हर बात के लिए खुद को  कोसु.. 

मैं ही क्यों हर बार त्याग करू...




क्या बेटी का मन नहीं होता....

अपनी इच्छा को सबके सामने रखने का..

या फिर उसका हक़ नहीं होता...

अपने सापको को पूरा करने का....

मैं ही क्यों... अपनी इच्छाओ का गला घोटू..

मैं ही क्यों... अपने सपनो को पूरा होने से रोकू...



मेरा कुछ बोलना लोग बगावत समझते है...

अगर कुछ मांगू तो खिलाफत समझते है...

क्यों मुझे ही समाज के नाम पे दबाया जाता है...

क्यों मेरी भावनाओ को मिटाया जाता है.....

मैं ही क्यों खुद को समाज की भट्टी में झोकू..

मैं ही क्यों अपनी भावनाओ को रोंदू.....

मैं ही क्यों .........!!!!!


Stop Domestic Violence Against Women