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ढीठ.. !!!!

जो तू अड़ियल, तो मैं भी ढीठ  बड़ी !
जो तू सामन्त, तो मैं  भी सैठ  बड़ी !!
मत कर जतन उलझाने की मुझे !
जीतेगी तो तुझसे मेरी ऐंठ  बड़ी !!

Comments

  1. आपकी कवितायें सहजता से गंभीर बातें कहती हैं

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एक कदम और चलते है ।

आ चल एक कदम और चलते है ।  दूर डगर नापने की बात करते है ॥  फूलो को हाथो में समेट,  पानी से आकाश की रंगोली भरते है।। 
एक कदम और चलते है ।।
आ मिल शाम को भोर बनाये।  आ मिल जोर से शौर मचाये ॥  सुरों को धुनों की मिटटी से मलते है , आ चल एक कदम और चलते है ।।
.....................  साथ चलते है ॥ 

निश्चय..!!

प्रारंभिक भोर में लिया दृढ़ निश्चय,

शंध्या आते विफलता की चौखट लांघ लेता है.!!

प्रतिबिम्ब सा मन ओज से भरा,

परिस्तिथियों से तल्लीन खुद को अधीन बना लेता है। !!

दुविधा...!!!!

मन ऐसो मेलन भरा, ते तन सुच्चो कैसो कहाय ...!
जे सोचु हरी ते पाप हरे, ते पूजन न सुहाय ...!!
ऐसो दुविधा सांस लगी, न निति कोई सुझाय ...!
तर जाऊ मैं पाप ते, या खुद ने देउ डुबोय ....!!