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आंसू और मुस्कान.....!!!

आज हवा को पिंजरे में कैद कर लिया मैंने
आज खुशबू को मिटटी में बिखेर दिया मैंने...
करनी थी चाँद से दो बात....
तो आज चाँद को भी पानी मैं उतार लिया मैंने...


यूँ चले रहो में..
की आज रास्ते ने खुद ही अपने कदम बढा लिए.
देखा राह को मंजिल के साथ ...
तो आज मंजिल को अपने कदमो से बांध लिया मैंने

यूँ आज आहट थी सुबाह..
एक ही दस्तक से दरवाजे खोल दिए...
देखा खुशियों को सुबाह के हाथ...
तो आज खुशियों से दिल को सजा लिया मैंने...


यूँ ढूंडा था जिसे मेने बरसो तक..
उसने आज खुद ही अपने हाथ बड़ा दिए..
देखा ख़ुशी को उसकी ख़ुशी के साथ ....
तो आज आंसू और मुस्कान को साथ पा लिया मेने..

Be Happy Always.....  :-)

Comments

  1. ANSHU OR MUSKAN YEH TOH WO HAIN JINKE BINA JINDAGI MAIN EK DUSREY KA GUJARA HI NAHI HAI..KYOUN KI ANSHU HONGE TABHI HUMMEY US MUSKAN KA PATA CHALEGA JO HUM LOGO KEY CHEHRE PEY ANSHU ANE KEY BAAD DIKHAYI DETI HAI.OR MUSKAN HOGI TOH HUMMEY US MUSKAN MAIN SEY JO HUMARI ANKHOON SEY JO ANSHU NIKALTE HAI NA USKA EHSHAAS HI KUCH ALAG RAHEGA..DONO HI APNI APNI JAGAH HAI PAR SAATH SAATH HAI...BAHUT SUNDER RACHNA SUMAN AISE HI LIKHTE RAHO HUMESHA..JAI MATA DI..:))

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  2. अरे वाह... अच्छी कविता... साधुवाद स्वीकारें

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  3. बहुत बहुत धन्यवाद् योगेन्द्र जी ....:))

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  4. सोच को शब्द देने का प्रशंसनीय तथा सार्थक प्रयास - ब्लॉग और शीर्षक भी आकर्षक लगा.

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  5. सुमन जी
    हार्दिक अभिवादन -बहुत ही सुन्दर जज्बात
    बहुत बढ़िया और अनूठा ख्याल लाजबाब प्रस्तुति
    .............आभार आप का

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  6. अस्वस्थता के कारण करीब 20 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

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  7. आज हवा को पिंजरे में कैद कर लिया मैंने
    आज खुशबू को मिटटी में बिखेर दिया मैंने...
    करनी थी चाँद से दो बात....
    तो आज चाँद को भी पानी मैं उतार लिया मैंने...

    Bahot bahot sundar lines hai superb superlike :)

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