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ख़ुशी.......!!!!

बंजर मिटटी को बारिश की बूंदों से ख़ुशी...
बारिश की बूंदों को बादल की ओट से ख़ुशी...
ख़ुशी आँखों को उसके सपनो से...
सपनो को चैन  की नींद से ख़ुशी.....

भक्त को उसके भगवान से ख़ुशी...
भगवान  को भक्त की भक्ति से ख़ुशी.....
ख़ुशी होटों को मुस्कराहट से...
मुस्कराहट को होटों के खिलने से ख़ुशी....


माँ को अपने बच्चे के खिलखिलाने से ख़ुशी...
बच्चे को अपनी  माँ के आंचल से ख़ुशी...
ख़ुशी कदमो को मंजिल के पाने से...
मंजिल को कदमो के पाने से ख़ुशी..

प्यार में किसी को सताने से ख़ुशी...
सता कर फिर मानाने से ख़ुशी...
ख़ुशी किसी के  आसुओं  को पौछ्ने से...
आसुओं को बहकर हसने से ख़ुशी...

किसी गिरते हुए को सहारे से ख़ुशी....
किसी सहारे को सँभालने से ख़ुशी......
ख़ुशी मुश्किलों को पार कर जाने से....
मुश्किलों को हराकर आगे बढ जाने से ख़ुशी.....

गरीब को रोटी के टुकरे से ख़ुशी.....
रोटी को गरीब की भूक मिटाने से ख़ुशी......
ख़ुशी खुशियों को हासिल कर जाने से.....
खुशियों को गम हारकर जीत जाने से ख़ुशी...


Keep Smiling 

Comments

  1. bahut sunder kavita...khushi khushi har taraf khushi..ishwar karey tumhey humesha khushi mile..aur tum isi tarah ki kavita likhtii rahoo...!! jai mata di !!

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  2. ह्र्दय की गहराई से निकली अनुभूति रूपी सशक्त रचना

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  3. कई दिनों व्यस्त होने के कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका

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  4. बहुत खूबसूरत कविता .....आपकी कलम अपने गंतव्य की ओर बहुत खूबसूरती से बढ़ रही है सुमन जी....इसे अपनी उँगलियों का सहारा देती रहिएगा...!! बहुत अच्छा लिख रही है आप.... शुभ कामनाएं....!!

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