Skip to main content

अच्छा लगता है........!!!!!

अच्छा लगता है तुमसे कुछ कहना...

तुम्हारी बातो को सुनना...

तुम्हे सोचते हुए ... आंखे बंद कर लेना.....

फिर मुस्करा देना.....

अच्छा लगता है........


हवा जब गुजरती है .. कानो से.. तो तुम्हे सोच लेती हूँ .....

की तुमने कुछ कहा है धीरे से......

उस हवा की फुसफुसाहट को सुनना...

अच्छा लगता है........


अकेले चलते हुए तुम्हे सोच लेती हूँ.....

की अगले ही पल तुम आओगे ...

और मेरा हाथ थाम के मेरे साथ चलोगे........

तुम्हारी सोच के साथ चलना......

अच्छा लगता है...........


भूल जाती हूँ मैं की उदासी भी कोई चीज होती है...

तुम्हे सोच कर गिरते हुए भी संभल जाती हूँ मैं..

तुम्हारी सोच में लगता है .. जैसे अनजानी सी खुसी मेरे पास है...

उस ख़ुशी को महसूस करना.....

अच्छा लगता है.........

Comments

  1. bahut he khubsurat Ahsaas..khud ko vanha paa janey jaisa.. :)

    ReplyDelete
  2. .....Bahut Khoobsoorat....!!!..ahsaas ki barish me hame bhi bhigone ke liye....!!!!!

    ReplyDelete
  3. अपने भावो को बहुत सुंदरता से तराश कर अमूल्य रचना का रूप दिया है.

    ReplyDelete
  4. suman bahut sunder kavita...tumahrii kavitaoon ko padna hummey bhi accha lagta hai...!! hare krishna !!

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

निश्चय..!!

प्रारंभिक भोर में लिया दृढ़ निश्चय,

शंध्या आते विफलता की चौखट लांघ लेता है.!!

प्रतिबिम्ब सा मन ओज से भरा,

परिस्तिथियों से तल्लीन खुद को अधीन बना लेता है। !!

पुरुषत्व ..!!

मेरे अभिमान को अहंकार का नाम देने से पहले
अपने पुरुषत्व की परिभाषा बदल,
ये तेरे द्वारा दिए गए अनुभवों का  ही परिणाम हैं ।।

दुविधा...!!!!

मन ऐसो मेलन भरा, ते तन सुच्चो कैसो कहाय ...!
जे सोचु हरी ते पाप हरे, ते पूजन न सुहाय ...!!
ऐसो दुविधा सांस लगी, न निति कोई सुझाय ...!
तर जाऊ मैं पाप ते, या खुद ने देउ डुबोय ....!!