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बोझिल बचपन...!!!

झुलसी नन्हे बचपन की फुहार, सिमटता नन्हे सपनो का संसार..! हर समय मजबूरी का चोला ओढ़े, झेलते स्वार्थी  समाज का तिरस्कार...!! वो नन्हा मटमैला सा मासूम, जिस पर छाई मजदूरी की धुप...! न खिलोनो से खेले कोई खेल, न जाने कागज़ पेंसिल का आकार...!! कभी चाय की दूकान पर बैठे, कभी स्टेशन तो कभी कारखाना...! कभी सडको पर पत्थर वो तोड़े, छोटे हाथो में लिए बड़े औजार...!! दिन के भूख की चिंता वो करते, साथ पढने की इच्छा भी गढ़ते...! बस दो रोटी से पेट भरने को, दिन भर मजदूरी को भी तैयार..!! कितने ही कानून मढ़े गये, करने को बाल श्रम का सुधार..! फिर भी सवाल बना हुआ है, कैसे होगा बोझिल बचपन का उद्धार..!!

पुजारिन......!!!

मैं तो तेरी पुजारिन हूँ प्रभु, न जानू मैं तेरा पूजन....! न उपासना का ज्ञान मुझे, जानू तो बस तेरा सिमरन ....!! हर पलछिन तेरा नाम जपु मैं, करू मैं तेरा चिंतन....! फिर क्यों फासे कष्ट जाल में देके मुझको जीवन....!! कैसे प्रभु तुम मेरे जो उद्धार न सको मेरा मन ....! कैसे पाप किये मेने जो कर न सको तुम नियोजन .....!! न मंगू मैं वैभव सुख का, न मांगू धन का लोभन....! मांगू इतने कष्ट में तुझसे घिस घिस बन जाऊ में कुंदन....!! तुझसे इतनी आस करू मैं भर दो दुख से दामन ....! न इच्छा हसने की मुझको, रोऊ मैं भर-भर अखियन.....!! तेरी भक्ति को कर्म मनु मैं करू तुझको जीवन अर्पण...! मैं तो तेरी पुजारिन हूँ प्रभु, करू मैं  तुझको नमन.....!!

आंसू और मुस्कान.....!!!

आज हवा को पिंजरे में कैद कर लिया मैंने आज खुशबू को मिटटी में बिखेर दिया मैंने... करनी थी चाँद से दो बात.... तो आज चाँद को भी पानी मैं उतार लिया मैंने... यूँ चले रहो में.. की आज रास्ते ने खुद ही अपने कदम बढा लिए. देखा राह को मंजिल के साथ ... तो आज मंजिल को अपने कदमो से बांध लिया मैंने यूँ आज आहट थी सुबाह.. एक ही दस्तक से दरवाजे खोल दिए... देखा खुशियों को सुबाह के हाथ... तो आज खुशियों से दिल को सजा लिया मैंने... यूँ ढूंडा था जिसे मेने बरसो तक.. उसने आज खुद ही अपने हाथ बड़ा दिए.. देखा ख़ुशी को उसकी ख़ुशी के साथ .... तो आज आंसू और मुस्कान को साथ पा लिया मेने.. Be Happy Always.....  :-)

ख़ुशी.......!!!!

बंजर मिटटी को बारिश की बूंदों से ख़ुशी... बारिश की बूंदों को बादल की ओट से ख़ुशी... ख़ुशी आँखों को उसके सपनो से... सपनो को चैन  की नींद से ख़ुशी..... भक्त को उसके भगवान से ख़ुशी... भगवान  को भक्त की भक्ति से ख़ुशी..... ख़ुशी होटों को मुस्कराहट से... मुस्कराहट को होटों के खिलने से ख़ुशी.... माँ को अपने बच्चे के खिलखिलाने से ख़ुशी... बच्चे को अपनी  माँ के आंचल से ख़ुशी... ख़ुशी कदमो को मंजिल के पाने से... मंजिल को कदमो के पाने से ख़ुशी.. प्यार में किसी को सताने से ख़ुशी... सता कर फिर मानाने से ख़ुशी... ख़ुशी किसी के  आसुओं  को पौछ्ने से... आसुओं को बहकर हसने से ख़ुशी... किसी गिरते हुए को सहारे से ख़ुशी.... किसी सहारे को सँभालने से ख़ुशी...... ख़ुशी मुश्किलों को पार कर जाने से.... मुश्किलों को हराकर आगे बढ जाने से ख़ुशी..... गरीब को रोटी के टुकरे से ख़ुशी..... रोटी को गरीब की भूक मिटाने से ख़ुशी...... ख़ुशी खुशियों को हासिल कर जाने से..... खुशियों को गम हारकर जीत जाने से ख़ुशी... Keep Smiling 

मैं ही क्यों .........!!!!!

मैं ही क्यों सबके सामने झुकू... मैं ही क्यों हर बार अपनी जिम्मेदारी निभाऊ...... मैं ही क्यों हर बात के लिए खुद को  कोसु..  मैं ही क्यों हर बार त्याग करू... क्या बेटी का मन नहीं होता.... अपनी इच्छा को सबके सामने रखने का.. या फिर उसका हक़ नहीं होता... अपने सापको को पूरा करने का.... मैं ही क्यों... अपनी इच्छाओ का गला घोटू.. मैं ही क्यों... अपने सपनो को पूरा होने से रोकू... मेरा कुछ बोलना लोग बगावत समझते है... अगर कुछ मांगू तो खिलाफत समझते है... क्यों मुझे ही समाज के नाम पे दबाया जाता है... क्यों मेरी भावनाओ को मिटाया जाता है..... मैं ही क्यों खुद को समाज की भट्टी में झोकू.. मैं ही क्यों अपनी भावनाओ को रोंदू..... मैं ही क्यों .........!!!!! Stop Domestic Violence Against Women 

माँ...!!!

माँ ... मै तो तेरी बेटी हूँ ....माँ ...... फिर क्यों नही तू मुझको   समझती.....माँ ... तेरी गोदी में सिर रख के सोना चाहती  हूँ ....माँ... एक बार तो मेरे सिर पे हाथ रख दो .... माँ... मुझे कोई सुख नही चाहिये...और न हीं कोई हँसी... मुझे तो बस दुःख की इच्छा है ... ...माँ...... जिससे  तू  मेरे साथ  रहेगी न ....माँ..... बस एक बार तो प्यार से पुकार लो..... माँ.... एक बार तो मुझसे बाते कर लो ..... माँ.... एक बच्चे की  तरह तुझसे लिपटना चाहती हु... माँ... एक बार  तो अपने हाथ बड़ा लो ..... माँ..... मैं कब से  तेरा रास्ता देख रही हूँ ... माँ... मेरे कदम अपनी और ले लो..... माँ..... ...माँ.....

अच्छा लगता है........!!!!!

अच्छा लगता है तुमसे कुछ कहना... तुम्हारी बातो को सुनना... तुम्हे सोचते हुए ... आंखे बंद कर लेना..... फिर मुस्करा देना..... अच्छा लगता है........ हवा जब गुजरती है .. कानो से.. तो तुम्हे सोच लेती हूँ ..... की तुमने कुछ कहा है धीरे से...... उस हवा की फुसफुसाहट को सुनना... अच्छा लगता है........ अकेले चलते हुए तुम्हे सोच लेती हूँ..... की अगले ही पल तुम आओगे ... और मेरा हाथ थाम के मेरे साथ चलोगे........ तुम्हारी सोच के साथ चलना...... अच्छा लगता है........... भूल जाती हूँ मैं की उदासी भी कोई चीज होती है... तुम्हे सोच कर गिरते हुए भी संभल जाती हूँ मैं.. तुम्हारी सोच में लगता है .. जैसे अनजानी सी खुसी मेरे पास है... उस ख़ुशी को महसूस करना..... अच्छा लगता है.........