आ चल एक कदम और चलते है ।
दूर डगर नापने की बात करते है ॥
फूलो को हाथो में समेट,
पानी से आकाश की रंगोली भरते है।।
एक कदम और चलते है ।।
आ मिल शाम को भोर बनाये।
आ मिल जोर से शौर मचाये ॥
सुरों को धुनों की मिटटी से मलते है ,
आ चल एक कदम और चलते है ।।
..................... साथ चलते है ॥
बहुत खूब
ReplyDeleteअद्भुत सुंदर रचना... :)
ReplyDeleteबहुत खूबसूरत
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