दुविधा...!!!! January 21, 2013 मन ऐसो मेलन भरा, ते तन सुच्चो कैसो कहाय ...! जे सोचु हरी ते पाप हरे, ते पूजन न सुहाय ...!! ऐसो दुविधा सांस लगी, न निति कोई सुझाय ...! तर जाऊ मैं पाप ते, या खुद ने देउ डुबोय ....!! Read more